Thursday, 27 November 2008

|| ज़िन्दगी ||

ज़िन्दगी का अब कोई भरोसा है नहीं

आज तो है पर कल शायद न हो कहीं

रहे जाए न कोई बात किसी से अनकही

क्या पता आज ज़िन्दगी का आखरी दिन तो नहीं

Sunday, 9 November 2008

क्या खोया क्या पाया मैंने ??? !!!

क्या खोया क्या पाया मैंने ?
दिल का चैन गवाके !
क्या खोया क्या पाया मैंने ?
याद में आसूं बहाके !
क्या खोया क्या पाया मैंने ???

साथ में उसके जब रहेता था
खुशियों में खोया रहेता था
बिछड़ के उससे तनहा होके !!
क्या खोया क्या पाया मैंने ???

उसकी खनक से होता था सवेरा
उसके पहेलु में हो अँधेरा
दिन रैना का होश गवाके !!
क्या खोया क्या पाया मैंने ???