Saturday, 11 July 2009

तेरे इन्तेज़ार में

तेरे इन्तेज़ार ने क्यूँ मुझको इतना तडपाया
तेरे दिल को भी जाने कैसे सुकून आया !
तेरी यादों से अपने दिल को मैंने बहेलाया
तेरे दिल को भी जाने कैसे सुकून आया !

2 comments:

Rambler said...

I have always wondered when people write love poems, are they in love or wanting to be in love or fresh out of love?

Koyeli said...

Kya baat hain tum to shaayar ban gaye :)