Thursday, 27 March 2008

|| तेरे बिना ||

ये हसीन वादियों का लुफ्त,
अधूरा है तेरे बिना |
चाँद भी खिला है इन्तेज़ार में,
पर आधा है तेरे बिना ||

तुम जो होते इधर तो, महेफिलें सज जाती |
चट्टानें भी लहेरती यहाँ, पर खामोश है तेरे बिना ||

तुम्हारा साथ पाकर तो, कलियाँ भी खिल जाती |
बहारें ही लहेरती यहाँ, पर पतझड़ है तेरे बिना ||

अब तो ये हालत है जांबाज़, के लोग भी कहने लगे हैं ये |
पहेले तो अच्छा भला था ये, पर पगला गया है तेरे बिना ||

तू कौन है, रहेती है कहाँ, पता जो मिल जाए तो आ जाऊँ वहां |
कब से ढूंढ रहा हूँ तुझको अकेला, क्योंकि अधूरा हूँ तेरे बिना ||

२२ मार्च २००८
Verzaska - Switzerland.

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